बिश्नोई समाज के गोत्र

बिश्नोई (विश्नोई) हिन्दू धर्म का पंथ है। इस पंथ के संस्थापक गुरू जंभेश्वर जी है, जिन्हें जाम्भोजी (JambhoJi)के नाम से भी जाना जाता है। जाम्भोजी महाराज द्वारा बताये 29 नियमों का पालन करने वाला बिश्नोई है। सम्वत् 1542 की कार्तिक बदी 8 को जांभोजी महाराज ने एक विराट यज्ञ (हवन) का आयोजन सम्भराथल धोरे पर किया और 29 नियमों की दीक्षा एवं पाहल देकर बिश्नोई धर्म की स्थापना की।
बिश्नोई पंथ में दीक्षित होने वाले सभी जातियों के व्यक्ति थे उसमे अधिकांश व्यक्ति जाट थे। सभी धर्मों के व्यक्तियों में से 29 नियमों का पालन करने वाले बिश्नोई कहलाये। बिश्नोई पंथ में दीक्षित होने वाले सभी जातियों के लोगों के पीछे जो भी गौत्र था उसका बदला नहीं गया एवं ज्यों का त्यों ही रखा गया | लगभग 371 जातियों के लोगों ने गुरुजी से दीक्षा लेकर बिश्नोई बने थे | वे इस प्रकार हैं Bishnoi gotra list –
अग्रवाल
अभीर
अडिंग
अहीर
अडोल
अवतार
अहोदिया
अत्रि
अतलि
आंजणा
आमरा
आयस
आसियां
आनणा
आखा
अखिंड
ईहराम
ईसराम
ईसारवा
ईसरवाल
ईनणिया
ईयार
ईडंग
उत्कल
उमराव
ऊनिया
ऐचरा
ऐरण
ऐरब
ओऊ
ओला
ओदीया (अहोदिया)
ओटिया
ओरिया
कडवासरा(कुराडा)
कसवझ(कांवा)
करीर
कणेटा
कसबी
कबीरा
कलवाणिया
कलेडिया
कमणिगारा
करड
कमेडिया
कच्छ्वाया/कच्छ्याई
कश्यप
कलीराण(कल्याणा)
काकड़
कालडा
कासणिया
कामटा
कांसल
कांगड़ा
किरवाला
किकरं
खदाब
खडहड
खेडी
खोखर
खाट
खाती
खावा
खारा
खिलेरी
खिचड
खुड्खुडिया
खेरा
खोखर
खोत
खोजा
खोड
गर्ग
गावाल
गायणा
गाट
गीला
गुरु
गुजेला (उदावत)
गुरुसर
गुजर
गुजर गौड़
गुलेजा
गुप्ता
गुरुड़
गुडल
गेर
गेहलोत
गोदारा (सोनगरा)
उदाणी
खिरंगिया
धोलिया
बब्नीड
सिसोदिया
देवड़ा
गोरा
गोयत
गोयल(गोभिल,गोविल,गोहिल)
गोगियां
गौला
गौड़
घणघस
घटियाल
घांगु
चंदेल
चांगडा
चैहान
चौहान(चवाण)
छीपा(दरजी )
ज्वर(जौहर)
जांगू
जाखड
जायल
जाजूदा
जाला
जाणी
जांगड़ा
झांस
झांग
झाझडा
झाझण
झाला
झुरिया
झोधकण(जोधकरण)
झाडा
झोरड
टणडन
टाडा
टांडी(तांडी)
टुसिया(टुहिया)
टोकसिया
ठकरवा
ठोड
डबोकिया
डारा
डागा
डागर
डिंगल
डूडी
डेहला
डेलू
ड़ोगिपाल
ढल
ढहिया
तोड
तंवर(तिंवर)
थलवट
थालोड
थापण(चौहान,साहू)
थोरी
दडक(धडक)
दरजी
दासा
दिलोहया(दुलोलिया)
दुगसर
देहडू
दहिया
देवड़ा(खेडेवाला)
टोहरावाला
लोढ़ा
दोतड
धतरवाल
धधारी
धारणिया
धायल
धामू
धरिया
धूमर
नरूका
नकोसिया
नफरी
नाडा
नाईया
नागर
नाथ
नाई
निरबान
निबिबागा
नेहरा
नैण
परमार (पंवार ,पवार ,पुआर ,पुवार)
पंवार (कुलडिया)
पडियाल(पडिहार)
पठान
पराशर
प्यारी
पालाडिया
पारस
पाल
पाटोदिया
पारिक
पिथरा
पुरवार(पुरवाल,पोरवाल ,पैरवाल)
पुड्या
पुष्करणझ(पोहकरण)
पुनिया
पोटलिया
पंडवालिया (पवाडिया)
फलावर
बरड
बदिता
बड़ोला
बडएड
ब्रदाई
बनगर
बटेसर
बलावत
बेनीवाल (बेहानीवाल, बिणियाल)
बेरवाल
बळडिकिया
बजाज
बलोंइया
बछियाल
बलाई
बड़ोला
बसोयाल
बंसल
बदिया
बल्हाकिया
बरूडिया
बाबल
बाणीछू
बागडिया
बाजरिया
बाटेडा
बणिया (बनिया)
बावरी
बांगडवा
बाना
बाजिया
बाडंग
बासत
बागेशु
बाकेला
बाघेला
बनारवाल (अहीर )
बिच्छू
बिडासर
बिलाद
बिडाल
बिडग
बिडियाराझ
बिडार
बिलोनिया
बिलोडिया
बुडिया
भवाल
भट्ट
भलुडिया
भांबू(भाम्भू )
भादू
भरवार
भोडर,
भाडेर,
भारद्वाज
भिलुमिया भींचर
भोजावत
भोडिसर
भोछा
भूरटा
भूरंट
भुट्टा
भूल
भूश्रण
मंडा
मतवाला
महिया (मईया)
मल्ला
मारत
मांजू
माल
माचरा
मलपूआ
मालपुरा
मालीवाल
माहेश्वरी
मातवा
मांदु
माई
मांगलिया
मिश्र
मितल
मील
मीठातगा
मुरटा
मुंडेल
मुदगिल
मुरिया(मावरिया)
मुंढ
मेहला
मेवदा
मोहिल
मोगा
रशा
रंगा
रघुवंशी
राड(राहड़)
रायल
राव
रायत
राठौड़
राणोत
रिणवा
रूबाबल
खोडा
रोहज
रोझा
रोड
लटियाल
लरियाल
लाम्बा
लुदरिया
लागी
लोल
लोहमरोड़
लुहार
वरा
व्यास
वरासर
वासनेय
वात्सल्य
विलाला
विसु
सराक
सरावक्
सहू(साहू, सोहू)
सदु
सगर
साईं
सान्वक
साहरण (सारण)
सांखल (सागर)
सारस्वत
साबण (शाबण)
सियाक(सियाग ,सियाख ,सिहाग)
सिसोदिया
सिंघल (सिंगल,सिंगला सिंहला)
सेंवर(सिंवर)
सियोल (सिंवल)
सिवरखिया
सिरडक
सिरोडिया
सिंधल
सिरडिया
सीलक
सिगड़
सुथार(खाती,जांगड़ा,बढ़ई,तरवान)
सुनार
सूर
सांखला(एयर )
सेरडिया
सेवदा
सेहर (शेर)
सेधो( सेथो)
सेंगडा
सोढा
सोलंकी
सोनक (सुनार)
शांक
शाह
शाणडलय
शिव
श्रीमाली
शिढोला
हरडु
हरीजा
हाडा (उदावत,बलावत,भोजावत)
हरिया
हरिवासिया
हुमडा
हुड्डा
बिश्नोई कितने प्रकार के होते हैं?
बिश्नोई समाज में लगभग 371 उपजातिया हैं। जिन्हें गोत्र कहा जाता हैं। बिश्नोई पंथ में दीक्षित होने वाले सभी जातियों के लोगों के पीछे जो भी गौत्र था उसका बदला नहीं गया एवं ज्यों का त्यों ही रखा गया | लगभग 371 जातियों के लोगों ने गुरुजी से दीक्षा लेकर बिश्नोई बने थे |
